भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का नया मील का पत्थर: आगामी चंद्र व सौर मिशनों हेतु उन्नत क्रायोजेनिक एवं पेलोड परीक्षण सफल
बेंगलुरु/नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वैश्विक अंतरिक्ष जगत में भारत के बढ़ते तकनीकी वर्चस्व को एक बार फिर सिद्ध करते हुए अपने आगामी महत्वाकांक्षी चंद्र नमूना वापसी मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन मॉड्यूल के लिए उन्नत क्रायोजेनिक इंजन (CE-20) का सफल हॉट-फायर परीक्षण पूरा कर लिया है। यह ऐतिहासिक परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में पूर्ण मिशन अवधि के लिए किया गया।
इसरो द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, परीक्षण के दौरान थ्रस्ट चैंबर, टर्बोपंप, गैस जनरेटर और इग्निशन सिस्टम के सभी पैरामीटर उत्कृष्ट और निर्धारित मानकों के बिल्कुल अनुकूल पाए गए। इस उन्नत क्रायोजेनिक इंजन की क्षमता एलवीएम-3 (LVM3) भारी प्रक्षेपण यान की पेलोड ले जाने की क्षमता को वर्तमान से लगभग 500 किलोग्राम अधिक बढ़ाने में सक्षम होगी, जिससे गहरे अंतरिक्ष में भारी उपग्रहों को सटीक कक्षाओं में स्थापित किया जा सकेगा।
इसके साथ ही, इसरो के वैज्ञानिकों ने आगामी सौर अध्ययन वेधशाला और शुक्र ऑर्बिटर मिशन के लिए विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक ऑप्टिकल व स्पेक्ट्रोस्कोपिक पेलोड्स के वैक्यूम और थर्मल परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष ने सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधार्थियों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' के अंतरिक्ष विजन का जीवंत प्रमाण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि भारत के वैज्ञानिक युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संचार कर रहे हैं और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तथा 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री उतारने का राष्ट्रीय संकल्प तीव्र गति से साकार हो रहा है।
इस समाचार की अखबार कतरन (Newspaper Cutting)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का नया मील का पत्थर: आगामी चंद्र व सौर मिशनों हेतु उन्नत क्रायोजेनिक एवं पेलोड परीक्षण सफल
बेंगलुरु/नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वैश्विक अंतरिक्ष जगत में भारत के बढ़ते तकनीकी वर्चस्व को एक बार फिर सिद्ध करते हुए अपने आगामी महत्वाकांक्षी चंद्र नमूना वापसी मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन मॉड्यूल के लिए उन्नत क्रायोजेनिक इंजन (CE-20) का सफल हॉट-फायर परीक्षण पूरा कर लिया है। यह ऐतिहासिक परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में पूर्ण मिशन अवधि के लिए किया गया।
इसरो द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, परीक्षण के दौरान थ्रस्ट चैंबर, टर्बोपंप, गैस जनरेटर और इग्निशन सिस्टम के सभी पैरामीटर उत्कृष्ट और निर्धारित मानकों के बिल्कुल अनुकूल पाए गए। इस उन्नत क्रायोजेनिक इंजन की क्षमता एलवीएम-3 (LVM3) भारी प्रक्षेपण यान की पेलोड ले जाने की क्षमता को वर्तमान से लगभग 500 किलोग्राम अधिक बढ़ाने में सक्षम होगी, जिससे गहरे अंतरिक्ष में भारी उपग्रहों को सटीक कक्षाओं में स्थापित किया जा सकेगा।
इसके साथ ही, इसरो के वैज्ञानिकों ने आगामी सौर अध्ययन वेधशाला और शुक्र ऑर्बिटर मिशन के लिए विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक ऑप्टिकल व स्पेक्ट्रोस्कोपिक पेलोड्स के वैक्यूम और थर्मल परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष ने सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधार्थियों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' के अंतरिक्ष विजन का जीवंत प्रमाण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि भारत के वैज्ञानिक युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संचार कर रहे हैं और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तथा 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री उतारने का राष्ट्रीय संकल्प तीव्र गति से साकार हो रहा है।