📍 नई दिल्ली • पटना • वर्ष 1, अंक 42
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📅 बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 • संवत 2083
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बिहार के सभी 38 जिलों में स्थापित होंगी अत्याधुनिक सड़क निर्माण परीक्षण प्रयोगशालाएं, पथ निर्माण विभाग सख्त

बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने राज्यभर में चल रहे ग्रामीण एवं उच्चस्तरीय सड़क निर्माण कार्यों में पारदर्शिता व मजबूती सुनिश्चित करने के लिए सभी 38 जिलों में आधुनिक सामग्री परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
बिहार के सभी 38 जिलों में स्थापित होंगी अत्याधुनिक सड़क निर्माण परीक्षण प्रयोगशालाएं, पथ निर्माण विभाग सख्त
📸 बिहार में राजमार्ग एवं ग्रामीण सड़क निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का स्थल परीक्षण करते अभियंता।

गया/पटना। बिहार में ग्रामीण और राजकीय राजमार्ग नेटवर्क को टिकाऊ और आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए पथ निर्माण विभाग ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है। विभाग ने राज्य के सभी 38 जिलों में अत्याधुनिक 'सड़क एवं पुल सामग्री गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं' (Quality Testing Labs) स्थापित करने की औपचारिक कार्ययोजना जारी कर दी है। इस परियोजना के लिए प्रारंभिक चरण में 120 करोड़ रुपये का आवंटन स्वीकृत किया गया है।



विभागीय सचिव ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में घोषणा की कि इन आधुनिक प्रयोगशालाओं में कंक्रीट, बिटुमेन (तारकोल), सीमेंट, बालू और गिट्टी की भार वहन क्षमता और तापमान प्रतिरोधक क्षमता की जांच आधुनिक डिजिटल उपकरणों के जरिए की जाएगी। किसी भी सड़क परियोजना का अंतिम भुगतान तभी जारी किया जाएगा, जब जिले की अधिकृत प्रयोगशाला से गुणवत्ता प्रमाण पत्र (Quality Certificate) डिजिटल रूप से सत्यापित होगा।



इसके अतिरिक्त, विभाग ने 'पथ निरीक्षण' नामक एक केंद्रीकृत मोबाइल ऐप और जीपीएस-सक्षम फील्ड मॉनिटरिंग सिस्टम भी शुरू किया है। इसके माध्यम से सहायक और कार्यपालक अभियंता कार्यस्थल से जियो-टैग्ड तस्वीरें और प्रगति रिपोर्ट सीधे मुख्यालय के डैशबोर्ड पर अपलोड करेंगे। घटिया सामग्री का उपयोग पाए जाने पर संबंधित संवेदक को काली सूची (Blacklist) में डाला जाएगा और विभागीय अभियंताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।



स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस व्यवस्था की सराहना की है। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी, बल्कि बाढ़ और भारी मानसूनी वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में भी सड़कों की उम्र और मजबूती में उल्लेखनीय सुधार होगा।

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बिहार के सभी 38 जिलों में स्थापित होंगी अत्याधुनिक सड़क निर्माण परीक्षण प्रयोगशालाएं, पथ निर्माण विभाग सख्त

बिहार के सभी 38 जिलों में स्थापित होंगी अत्याधुनिक सड़क निर्माण परीक्षण प्रयोगशालाएं, पथ निर्माण विभाग सख्त
📸 बिहार में राजमार्ग एवं ग्रामीण सड़क निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का स्थल परीक्षण करते अभियंता।

गया/पटना। बिहार में ग्रामीण और राजकीय राजमार्ग नेटवर्क को टिकाऊ और आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए पथ निर्माण विभाग ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है। विभाग ने राज्य के सभी 38 जिलों में अत्याधुनिक 'सड़क एवं पुल सामग्री गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं' (Quality Testing Labs) स्थापित करने की औपचारिक कार्ययोजना जारी कर दी है। इस परियोजना के लिए प्रारंभिक चरण में 120 करोड़ रुपये का आवंटन स्वीकृत किया गया है।

विभागीय सचिव ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में घोषणा की कि इन आधुनिक प्रयोगशालाओं में कंक्रीट, बिटुमेन (तारकोल), सीमेंट, बालू और गिट्टी की भार वहन क्षमता और तापमान प्रतिरोधक क्षमता की जांच आधुनिक डिजिटल उपकरणों के जरिए की जाएगी। किसी भी सड़क परियोजना का अंतिम भुगतान तभी जारी किया जाएगा, जब जिले की अधिकृत प्रयोगशाला से गुणवत्ता प्रमाण पत्र (Quality Certificate) डिजिटल रूप से सत्यापित होगा।

इसके अतिरिक्त, विभाग ने 'पथ निरीक्षण' नामक एक केंद्रीकृत मोबाइल ऐप और जीपीएस-सक्षम फील्ड मॉनिटरिंग सिस्टम भी शुरू किया है। इसके माध्यम से सहायक और कार्यपालक अभियंता कार्यस्थल से जियो-टैग्ड तस्वीरें और प्रगति रिपोर्ट सीधे मुख्यालय के डैशबोर्ड पर अपलोड करेंगे। घटिया सामग्री का उपयोग पाए जाने पर संबंधित संवेदक को काली सूची (Blacklist) में डाला जाएगा और विभागीय अभियंताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस व्यवस्था की सराहना की है। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी, बल्कि बाढ़ और भारी मानसूनी वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में भी सड़कों की उम्र और मजबूती में उल्लेखनीय सुधार होगा।

✍️ अधिकृत संवाददाता: राजेश कुमार (पटना) 📰 लोक हुंकार दैनिक समाचार कतरन
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